नेता कर ले चाहे बड़े-बड़े घोटाले
पशुओ को पड़े चाहे चारों के लाले
वतन हो जाए चाहे दुश्मनों के हवाले
पर कुछ फर्क नहीं पड़ता ||
कुछ फर्क नहीं पड़ता | कविता
Posted in सामयिक मुद्दे by anamika 567 दिन पहले (http://kavyana.blogspot.com)इसके लिए वोट करने वाले
ब्लॉग मंडली एक खुले मंच वाली लेखन प्रबंधन प्रणाली है जिसके द्वारा आसानी से अपना खुद का ऑनलाईन सामाजिक दायरा.बनाया जा सकता है
विज्ञापन
देखिए हिन्दी चिट्ठाकारों का ऑनलाईन फोरम
Saved Stories













