आज न गुनगुनाओ कोई प्रेम गीत
न करो दिल-विल की बातें
सुन लो तुम जन-जन की पुकार
धरती पुकारे फैलाकर बांहे
आज न गुनगुनाओ .... | कविता
Posted in सामाजिक प्रश्न by anamika 632 दिन पहले (http://kavyana.blogspot.com)इसके लिए वोट करने वाले
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